आनंद राज, प्रयागराज: इंडियन प्रीमियर लीग की मेगा नीलामी (IPL 2022 Mega Auction) में कई क्रिकेटरों पर पैसों की खूब बारिश हुई। लाखों-करोड़ों में बिके देसी क्रिकेटर्स में से एक हैं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले यश दयाल (Yash Dayal Sold To GT)। यश को आईपीएल की नई टीम गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans Bought Yash Dayal In 3.2 Crore) ने 3.2 करोड़ रुपये की बोली लगाकर टीम में शामिल किया। यह मोमेंट उनके और उनकी फैमिली के लिए बेहद खास है। खास सिर्फ इसलिए नहीं कि वह दुनिया की सबसे बड़ी लीग में खेलने जा रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि उनके पिता चंद्रपाल दयाल (Yash Dayal Father Chandrapal) का सपना पूरा होता दिखाई दे रहा है।

अधूरा रहा था पिता का सपना, अब बेटा करेगा पूरा
दरअसल, जब यश ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत की थी तो लोग शिकायती लहजे में ताने देते थे कि आपका बेटा बेकार हो जाएगा। वह दिनभर क्रिकेट खेलता रहता है, लेकिन चंद्रपाल हमेशा ऐसे लोगों को नजरअंदाज कर देते थे। उन्हें बेटे पर विश्वास था कि वह एक दिन जरूर उनके सपने को साकार करेगा। चंद्रपाल बेटे को इसलिए भी बड़ा क्रिकेटर बनाना चाहते थे, क्योंकि वह खुद भी जोनल क्रिकेटर रह चुके हैं और इंटरनेशनल क्रिकेटर बनने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका था। इस बात की उनके अंदर टीस थी, जिसे बेटे के जरिए पूरा करना चाहते थे।

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ताना देने वाले तारीफ करते नहीं थकते
उनका यह विश्वास रंग लाया। बेटा न केवल भारतीय टीम के लिए जल्द खेलते दिखाई दे सकता है, बल्कि दुनिया की बड़ी लीग के लिए भी उसे चुना जा चुका है। जो लोग कभी ताने देते थे अब तारीफ करते नहीं थकते हैं। इस बारे में चंद्रपाल ‘नवभारत टाइम्स ऑनलाइन’ से कहते हैं, ‘पड़ोस के लोग कहते थे कि आपका बेटा हर वक्त क्रिकेट खेलता है। यह अच्छी बात नहीं है। लेकिन मैं उन्हें नजरअंदाज करता था। बेटे को खेलते देख खुशी होती थी। अब जब यश सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ गया तो वही लोग उसकी तारीफ करते नहीं थकते हैं।’

8 वर्ष की उम्र में शुरू किया खेलना
बेटे के क्रिकेट करियर की शुरुआत को लेकर उन्होंने बताया, ‘उसने 8 वर्ष की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया और 10 साल की उम्र में सीनियर डिवीजन लीग मैच के लिए खेला था। उस वक्त लोगों ने कहा था कि वह बहुत छोटा है चोट लग सकती है, लेकिन मेरा मानना है कि खेलेगा तभी तो आगे बढ़ेगा। देखिए, वह उत्तर प्रदेश टीम का प्रमुख पेसर है और भारत के लिए भी खेल सकता है। यही मेरा और उसका सपना है।’

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इसलिए खोली खुद की अकैडमी
चंद्रपाल ने एजी ऑफिस में स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी पाई थी। वह विजी ट्रॉफी में खेल चुके हैं। वह चाहते थे कि टीम इंडिया के लिए खेलें, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बेटे यश को शुरुआत से ही क्रिकेट अकैडमी भेजना शुरू कर दिया। इस बारे में उन्होंने बताया, ‘मैंने उसे पास की अकैडमी में भेजा था, लेकिन उसने बताया कि वहां उसे खेलने का मौका ही नहीं मिलता था। इस वजह से मैंने खुद की अकैडमी खोली और कोचिंग देने लगा।’

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रंग लाई मेहनत
यस में बचपन से ही एक अच्छा क्रिकेटर बनने की ललक थी, लेकिन कुछ साल बाद ही उनको ऑफिस की दिक्कतों की वजह से कोचिंग बंद करना पड़ा। हालांकि, तब तक उनका बेटा अच्छी क्रिकेट खेलने लगा था और उनकी कोशिश रंग लाई। बता दें कि विजय हजारे ट्रोफी में वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले पांच गेंदबाजों मे शामिल थे। उन्होंने 3.77 के इकॉनमी रेट से 14 विकेट लिए थे। यश दयाल लगातार 140 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार में गेंद फेंक सकते हैं। यूपी की ओर से खेलते हुए उन्होंने 142 किमी की रफ्तार से गेंदबाजी कर सुर्खियां बटोरी थीं।

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