नई दिल्ली: वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज (India vs West Indies) के पहले मैच में विराट कोहली (Virat Kohli) बल्ले से कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए। बावजूद इसके वह सुर्खियों में रहे। मैदान पर उनकी मौजूदगी को महसूस किया गया। पूर्व कप्तान कोहली (Virat Kohli in Ahmedabad ODI) अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम (Narendra Modi Stadium) पर काफी ऐक्टिव दिखाई दिए। फील्डिंग के दौरान वह लगातार कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दिए। यहां तक कि उन्होंने रोहित को DRS लेने के लिए भी मनाया, जो आखिर में सही फैसला साबित हुआ।

रोहित भले ही कप्तान हों लेकिन इसके बावजूद विराट कोहली (Rohit Sharma and Virat Kohli) मैदान पर अपने उसी पुराने अंदाज में नजर आए। फैंस के लिए बहुत रोमांचक था कि जिस अंदाज में विराट कोहली कप्तान रोहित शर्मा (Virat Kohli and Rohit Sharma on Ground) को सलाह दे रहे थे उसे देखकर फैंस काफी रोमांचित हो गए। उन्होंने इसकी खूब तारीफ की।

यह घटना पारी के 21वें ओवर में लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) की गेंद पर विंडीज के बल्लेबाज शमारह ब्रुक्स के खिलाफ जोरदार अपील हुई। गेंद तेजी से टर्न हुई और भारतीय टीम के खिलाड़ियों का मानना था कि वह बल्ले का किनारा लेती हुई विकेटकीपर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) के दस्तानों में गई है। हालांकि इस बीच ऐसी भी राय थी कि आवाज बल्ले से पैड से टकराने की आई है। चहल को यकीन था कि गेंद बल्ले से लगी है। हालांकि पंत अनिर्णय की स्थिति में थे। इस बीच विराट ने चहल के फैसले का समर्थन किया। विराट की बात सुनते ही रोहित ने DRS लेने का फैसला किया। DRS को लेकर भारत के लिए वह अच्छा दिन रहा था। तीन बार भारतीय टीम अंपायर के फैसले के खिलाफ गई और तीनों बार यह सही साबित हुआ।

टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज अजय जडेजा (Ajay Jadeja) का मानना है कि विराट कोहली जैसे दमदार खिलाड़ी को अपना रवैया कायम रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तानी जाने से विराट साइडलाइन (Virat Kohli Sideline) नहीं हो जाएंगे क्योंकि करियर के शुरुआती दौर से ही उनमें लीडरशिप क्वॉलिटी है। सीनियर टीम में आने से पहले ही विराट कोहली की लीडरशिप क्वॉलिटी नजर आ गई थी। उनकी कप्तानी में भारत ने साल 2008 में अंडर-19 का वर्ल्ड कप (India U-19 World Cup) जीता था।

हमारी सहयोगी वेबसाइट क्रिकबज की खबर के मुताबिक जडेजा ने कहा, ‘खेल में त्वरित फैसले और मन की बात काफी मायने रखती है। आप कई मैचों में कप्तान रहे हैं और फैसले लेने में आपकी अहम भूमिका रही है। जब वह कप्तान नहीं भी थे तो भी उनमें लीडरशिप क्वॉलिटी थी। किसी ने उन्हें नहीं कहा था कि 2011 वर्ल्ड की जीत के बाद सचिन तेंदुलकर को अपने कंधों पर उठाकर मैदान का चक्कर लगाए।’

उन्होंने आगे कहा, ‘वह हमेशा से लीडर रहे और मुझे नहीं लगता वह पीछे हटेंगे। उनकी ऊर्जा और मानसिक स्थिति ने उन्हें काफी कामयाब बनाया और पांच लोगों, जिन्होंने किसी अन्य को कप्तान बनाया है, को लगता है कि अब विराट कोहली कप्तान नहीं हैं। लेकिन उनकी क्वॉलिटी और हुनर वही हैं। खिलाड़ी और चयनकर्ता आते जाते रहे हैं लेकिन लीडर हमेशा लीडर होता है।’

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