नई दिल्ली:सलीम दुरानी भारतीय क्रिकेट टीम के कमाल के ऑलराउंडर थे। 1971 में भारत ने जब वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी तो उसमें दुर्रानी की अहम भूमिका थी। दुर्रानी ने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स को आउट कर भारतीय टीम को न सिर्फ मैच में वापसी करवाई थी बल्कि जीत की राह भी तय की थी। लेकिन आज उनके हालात अच्छे नहीं हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह बात सामने आई है कि जिसमें उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में दावा किया जा रहा है।

सुनील गावस्कर ने कई बार कहा है कि वह सलीम दुर्रानी को सलीम अंकल ही कहा करते थे। भारतीय क्रिकेट में सलीम दुर्रानी को एक खास मुकाम हासिल है।

मशहूर पत्रकार विजय लोकपल्ली ने ट्वीट किया है, ‘1971 में पोर्ट ऑफ स्पेन में सलीम दुर्रानी ने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स को आउट कर मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया था। वाह, भारतीय क्रिकेट उन पर कितना निर्भर था। उनका परिवार उन्हें मिलने वाली पेंशन पर निर्भर है। आज वे जामनगर में एक किराए के घर में रहते हैं। वह एक भुला दिए गए आइकॉन है।’

दुर्रानी एक जीनियस खिलाड़ी थे। वह गेंद और बल्ले दोनों से भारतीय टीम को जीत दिला सकते थे। वह उन चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल थे जो जरूरत पड़ने पर तेजी से बल्लेबाजी कर या फिर अहम विकेट निकालकर अपनी टीम की तरफ मैच का रुख मोड़ देते। अफागनिस्तान में पैदा हुए दुर्रानी उस वक्त के भारतीय क्रिकेटरों से अलग थे। बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज दुर्रानी जब लय में होते तो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आक्रमण की भी धज्जियां उड़ा देते। उनकी छवि पब्लिक डिमांड पर छक्के लगाने की थी।

उन्होंने भारत के लिए 29 टेस्ट मैच खेले और इसमें 25.04 के औसत से 1202 रन बनाए। उन्होंने एक सेंचुरी और सात हाफ सेंचुरी लगाईं। उन्होंने 75 विकेट भी लिए और पारी में तीन बार पांच विकेट और मैच में एक बार 10 विकेट लेने का कारनामा किया।

कितनी पेंशन मिलती है
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड 31 दिसंबर 1993 से पहले रिटायर हुए सभी क्रिकेटर्स, जिन्होंने 25 टेस्ट से ज्यादा खेले हैं, को महीने की 50 हजार रुपये पेंशन देता है।



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