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Anil Kumble 10 Wickets: PAK के खिलाफ अनिल कुंबले के 10 विकेटों की कहानी का वो हिस्सा, जिसमें हीरो राहुल द्रविड़ हैं

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7 फ़रवरी. भारतीय क्रिकेट के लिये एक बहुत बड़ा दिन. वो दिन, जो इतिहास में दर्ज हुआ और सालों-साल जिसके बारे में बात होती रहेगी. इंडिया और पाकिस्तान के बीच हो रहे टेस्ट मैच का ये चौथा दिन था जो आख़िरी साबित हुआ. इसी दिन एक रिकॉर्ड बना. अनिल कुम्बले ने एक पारी में सभी विकेट अपने नाम किये. विवादों से घिरी सीरीज़, जिसका पहला टेस्ट मैच चेन्नई में हुआ और रोमांचक स्थितियों में भारत हार गया, अब 1-1 पर आ गयी थी. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपनी किताब टीम लोकतंत्र में इस टेस्ट मैच और अनिल कुम्बले के कारनामे के बारे में एक दिलचस्प कहानी बतायी. अनिल कुम्बले के अलावा, राहुल द्रविड़ भी इस कहानी के बड़े हीरो हैं. कहानी कुछ यूं है:

साल 1999. दिल्ली का फ़िरोज़ शाह कोटला मैदान. इंडिया और पाकिस्तान के बीच एक टेस्ट मैच खेला जा रहा है. इस मैदान में एक और ख़ास बात चल रही थी. ये वो मैदान था जहां देश के दो ज़माने एक दूसरे के सामने थे. जहां फ़िरोज़ शाह तुग़लक के शाही महलों के अवशेष और कंक्रीट का स्टेडियम दिखाई दे रहा था. 

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1883 में बना ये स्टेडियम ईडेन गार्डन के बाद देश का सबसे पुराना स्टेडियम है. इस स्टेडियम ने बेहतरीन मैचों की मेज़बानी की है. ये वही मैदान है जहां 1983 में सुनील गावस्कर ने डॉन ब्रैडमैन के सबसे ज़्यादा शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी की थी. और यहीं 2005 में सचिन ने सुनील गावस्कर को इसी मामले में पीछे छोड़ा था. और आज मेरा चार साल का बेटा ईशान और मैं एक टेस्ट मैच देख रहे हैं और हम इतिहास बनते हुए देखने वाले हैं. 

इंडिया और पाकिस्तान के बीच सभी मुक़ाबले हमेशा कुछ एक्स्ट्रा लेकर आते हैं और क्रिकेट इन दोनों देशों के बीच पिसता हुआ मालूम देता है. लेकिन 1999 की ये सीरीज़ कुछ अलग थी. पाकिस्तान ने एक रोंगटे खड़े कर देने वाले पहले टेस्ट मैच में जीत हासिल की थी और मैदान में मौजूद दर्शकों ने उनके लिए खड़े होकर तालियां बजाई थीं. दूसरी तरफ़ दिल्ली के लोग चूंकि विभाजन से ज़्यादा प्रभावित हुए थे, लिहाज़ा पाकिस्तान से मिली हार को क्षम्य नहीं मानते हैं. 

हमें वीआईपी पास मिला हुआ था. ये ‘तू जानता है मैं कौन हूं?’ वाले शहर में रसूख का गवाह था. फ़रवरी की हल्की ठंडी हवा और सूरज की हल्की गर्मी ने सब कुछ काफ़ी खुशनुमा कर दिया था. चौथी इनिंग्स चल रही थी और टीम इंडिया अपने पराक्रमी स्पिनर अनिल कुंबले की अगुवाई में मौके की तलाश में थी. पाकिस्तानी ओपनर्स ने सुबह की शुरुआत बेहतरीन बैटिंग से की और 100 रन से ऊपर की पार्टनरशिप बनाई. पाकिस्तान 420 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहा था. लंच तक पूरा मैदान सन्नाटे से भर गया था और सभी के चेहरे पर टेंशन साफी दिखाई दे रही थी. 

ईशान ने मुझसे पूछा, “पाकिस्तान जीत जाएगा क्या?” उसके हाथ में तिरंगा था. मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा, “नहीं नहीं. वो नहीं जीतेंगे. उन्हें आउट करने के लिए कुंबले है हमारे पास.” और मैं सही साबित हुआ. लंच और चाय के बीच गेंद को टप्पा खिलाने के बाद जम्बो जेट की तरह उठाने की क्षमता रखने की वजह से जम्बो के नाम से मशहूर कुंबले ने विकेट के बाद गिराने शुरू कर दिए. कुंबले ने इनिंग्स में सभी 10 विकेट लिए और इंडिया को जीत दिलाई. क्रिकेट के इतिहास में ये पहली बार हुआ था जब एक बॉलर ने एक इनिंग्स में 10 के 10 विकेट निकाले थे. (इंग्लैण्ड के जिम लेकर ने 1956 में पहली बार ऐसा कारनामा किया था.) 

दस विकेट लेने का जश्न ऐसे मना था.

मेरा उत्साह से भरा हुआ बेटा अब कुंबले का ऑटोग्राफ़ लेना चाहता था. लेकिन भयानक भीड़ ने कुंबले को घेर रखा था और उनका ऑटोग्राफ़ मिलना एक नामुमकिन काम लग रहा था. मुझे भी ऑफिस वापस जाना था. हम एक स्पेशल शो कर रहे थे जिसमें हम इस ऐतिहासिक जीत के बारे में बातें करने वाले थे. कुंबले के दोस्त और उनके ही जैसे बैंगलोर से आने वाले इंडियन क्रिकेटर राहुल द्रविड़ को हमने शाम के शो में एक्सपर्ट के तौर पर बुलाया हुआ था. हमने उन्हें लाने के लिए होटल एक कार भी पहुंचाई थी. लेकिन कार इंतज़ार कर रही थी और मुझे एक फ़ोन आया. द्रविड़ उस ओर से बात कर रहे थे. बोले, “देखिये मुझे नहीं लगता है कि आज मुझे आपके शो में होना चाहिए. एक बॉलर एक इनिंग्स में 10 विकेट ले ले, ऐसा रोज़ रोज़ नहीं होता है. ये अनिल कुंबले का दिन है. आपको उनका इंटरव्यू लेना चाहिए, मेरा नहीं.”

“लेकिन हम अनिल तक कैसे पहुंचें? हम एक घंटे में लाइव हो जायेंगे और उनका नंबर लगातार बिज़ी जा रहा है,” मैं लगभग घबराया हुआ बात कर रहा था. 

वो मुझे बताते हैं, “आप परेशान न हों, मैं कुछ इंतजाम करता हूं.”

उस शाम हमारे स्टूडियो में अनिल कुंबले मौजूद थे. हमें उनका एक्सक्लूज़िव इंटरव्यू मिला और मेरे बेटे को बेशकीमती ऑटोग्राफ़. कुंबले एक स्टार हैं लेकिन अपनी सौम्य और बेहद ज़मीनी सीमाओं के अंदर. द्रविड़ हमारे परदे के पीछे छिपे हीरो हैं. वो ऐसे दुर्लभ क्रिकेटर हैं जो लाइमलाइट से दूर रहने में और अपने साथियों की कामयाबी में खासी ख़ुशी पाते हैं. 

 



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